Thursday, 3 July 2014

यातना विरोधी बिल पास न होना शर्मनाक : पी0वी0सी0एच0आर0 [यू0पी0 प्रेस क्लब , लखनऊ] जून 26, 2014

लखनऊ. संयुक्त राष्ट्र में किये वादे के 30 वर्षो बाद भी भारत सरकार द्वारा अब तक इसे लागु न करना शर्मनाक है। यह बिल पिछले कई वर्षो से राज्य सभा में लंबित है और राजनितिक इक्षाशक्ति के आभाव में पास नहीं हो पा रहा है। विश्व यातना विरोधी दिवस के अवसर पर यु पी प्रेस क्लब में आयोजित सेमीनार में यह चिंता जाहिर की गयी। सेमिनार का आयोजन मानवाधिकार जन निगरानी समिति और यू पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त डा. सी पी राय ने कहा कि आजादी के इतने वर्षो के बाद भी पुलिस का चरित्र नहीं बदला है, हमें यातना की हर घटना को सुनते समय ग्लानी होती है। डा राय ने कहा कि जब किसी का उत्पीड़न होता है तब हम अपनी आँखे बंद कर लेते हैं अब मीडिया की एक बड़ी भूमिका है।

पी0वी0सी0एच0आर0 के संयोजक डा. लेनिन ने कहा कि यह विडम्बना है कि हम आज भी १८६१ में बनाये गए पुलिस एक्ट से संचालित हो रहे हैं जब समाज बनता हुआ था। आज स्थितियां बदल गयी है मगर दलितों और वंचितों पर होने वाले अत्याचार की प्रवृत्ति नहीं बदली। आज जरुरत है कि हम सभी को यातना रोकने के लिए आपसी तालमेल बनाना होगा।

समाजविज्ञानी डा0 योगेश बंधू ने सभी राजनितिक दलों के चुनावी घोषणापत्रों का विश्लेषण करते हुए कहा कि कम्युनिस्ट पार्टियों को छोड़ कर अधिकांश दलों का घोषणा पत्र एक जैसा ही है। इनमे सभी आदर्शवादी बाते हैं मगर अधिकारों कि बाते सिर्फ चन्द शब्दों में निपटा दिया गया।

सेमिनार में अपनी यातना के पीडतों ने भी अपनी बात रखी। बनारस की मुन्नी देवी ने बताया कि उनके पति की हत्या कर दी गयी और आजतक उसके परिवार को धमकियाँ मिल रही है।
 सोनभद्र की कूपन देवी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उसे डायन बता कर उसका उत्पीड़न किया गया है।






वरिष्ठ पत्रकार उत्कर्ष सिन्हा ने कहा कि यातना की घटनाओं में राज्य और तंत्र के साथ साथ समाज की भी बड़ी भूमिका है। जातिय द्वेष और सांप्रदायिक सोच ने शोषण और यातनाओं की कई घटनाओं को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस एक्ट के संशोधन के बिना व्यवस्था नहीं बदल सकती।

आई ऍफ़ जे डब्लू के राष्ट्रीय सचिव हेमंत तिवारी ने कहा कि हलाकि आज हम आधुनिक युग में जी रहे हैं मगर यह घटनाये हमें बताती है कि हमारी व्यवस्था अभी भी आदिम युग में जी रहे हैं। पुलिस के थर्ड डिग्री शब्द का चलन जब तक नहीं बंद होता तब तक यातना के विरुद्ध संघर्ष अपने मुकाम तक नहीं पहुचेगा। सरकारों को चाहिए कि वे यातना और उत्पीड़न करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान करे और उसे लागू भी सख्ती से करे।



बहुजन समाज पार्टी के दद्दू प्रसाद ने कहा कि यह देखना होगा कि यातना की प्रवृत्ति को समर्थन कहाँ से मिल रहा है। हम बीते ६४ वर्षो में समाज को नहीं बदल सके तो चिंतन करना होगा कि कमी कहाँ रही। उन्होंने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा कि शोषण आधारित समाज को ऐसे ही किताबो से ताकत मिलती है। हमें समाज में संघर्ष के लिए नवयुवको को खड़ा करना होगा।

लखनऊ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष सिद्धार्थ कलहंस ने कहा आज मीडिया में भी समाचारों को ले कर सामान भाव नहीं रह गया है। बदायूं की घटना को तो दिखाया जाता है मगर हरियाणा के भागना की घटना को कोई तवज्जो नहीं दी गयी। इस बात को भी ध्यान देना होगा।



पी0वी0सी0एच0आर0 की श्रुति नागवंशी ने कहा कि इस तरह के दिवसों का आयोजन करने से मुद्दे को सामने लाने में मदद मिलती है। जहाँ हम संगठित होते हैं वहां पुलिस का बर्ताव भी पीड़ित के साथ अलग ही होता है। जब भी किसी कमजोर तबके का केस आता है तब स्वाभाविक रूप से उसे दोषी मान लिया जाता है।

सम्मलेन की अध्यक्षता कर रहे हसीब सिद्दिक्की ने कहा हमें न्यायपालिका की कार्यपद्धति पर भी गौर करना होगा। उन्होंने ध्यानं दिलाते हुए कहा कि बड़े शहरों के घटनाओं को तो तवज्जो तो मिल जाति है मगर छोटे शहरों की घटनाये कही खो जाती हैं।

 सेमीनार का संचालन इरशाद अहमद नें किया।

सेमीनार में बड़ी संख्या में यातना पीड़ित, प्रदेश भर से आये पत्रकार और बुद्धिजीवियों ने रागिब अली, अनूप कुमार श्रीवास्तव, अजय सिंह, राजीव सिंह, जय कुमार मिश्र, आशीष अवस्थी और राम कुमार नें शिरकत की। धन्यवाद ज्ञापन शीरीन शबाना खान ने किया और 







Photo by: Rohit Kumar as initiative of PVCHR: life and struggle of Neo Dalit Movement through camera of born Dalit against caste system
http://www.bistandsaktuelt.no/nyheter-og-reportasjer/arkiv-nyheter-og-reportasjer/it-opptur-for-indias-kastel%C3%B8se

Thursday, 19 June 2014

Meeting on right to water security & rejuvenation of rivers as realization of real freedom at grassroot level [Hotel Kamesh Hut, Varanasi] June 17, 2014

Right to water security &  rejuvenation of rivers as realization of real freedom at grassroot level
- Jal Biradari & Bana Rahe Banaras
  





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Wednesday, 18 June 2014

Orientation workshop of PVCHR staff on ICPS by Ms. Nirupama, District Child Protection Officer, Varanasi [PVCHR office, Varanasi] June 16, 2014

Orientation workshop of PVCHR staff on Integrated Child Protection Scheme (ICPS) by the Ms. Nirupama, District Child Protection Officer, Varanasi. — at People's Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR).








 

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Saturday, 7 June 2014

फासीवादी हिंसा और बलात्कार की संस्कृति के खिलाफ विभिन्न जन संगठनों ने ‘बना रहे बनारस’ के बैनर तले कैंडल मार्च निकालकर विरोध दर्ज किया [आजाद पार्क, वाराणसी, वाराणसी] जून 6, 2014


वाराणसी के प्रगतिशील जनसंगठनो के साझा मंच बना रहे बनारस के बैनर तले प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकत्री सुश्री. तीस्ता सीतलवाड़ के नेतृत्व में टाऊन हाल मैदागिन से आजाद पार्क लहुराबीर चौराहे तक कैंडिल मार्च निकालकर फिरकापरस्त ताकतों और बलात्कार की संस्कृति के खिलाफ विरोध जताया | इस विरोध प्रदर्शन कैंडिल मार्च में वाराणसी के विभिन्न प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार और सम्मानित नागरिक और विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए |








 कैंडिल मार्च के बाद आजाद पार्क में हुए सभा में मानवाधिकार कार्यकर्ती सुश्री. तीस्ता सीतलवाड़ जी ने कहा कि पुणे में फेसबुक विवाद के कारण बीते सोमवार को चौबीस वर्षीय निर्दोष आईटी इंजीनियर मोहसिन शादिक शेख को कट्टर हिंद्वादी संगठन हिन्दू राष्ट्र सेना द्वारा पीट-पीटकर मार डाला गया | हिन्दू राष्ट्र सेना द्वारा 200 पब्लिक ट्रांसपोर्ट और निजी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया | मोहसिन की पिटाई में शामिल युवकों द्वारा मोहसिन की मौत के बाद मोबाईल से आपस में एक दुसरे को यह मैसेज भेजा गया कि पहला विकेट गिर गया जो यह प्रदर्शित करता है कि यह कोई आवेश में की गई हिंसा नही बल्कि यह हिन्दू राष्ट्र सेना की कट्टर फासीवादी विचारधारा के कारण सुनियोजित तरीके से की गयी अमानवीय और धर्म के नाम पर नफरत फ़ैलाने वाली घटना है | इस घटना की सभी धर्म और जातिय भेदभाव की खिलाफत करने वाले लोगों ने एक स्वर में घोर निंदा किया और इस घटना में आरोपियों के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की मांग केंद्र सरकार से किया जाना चाहिये | अभी उत्तर प्रदेश के बन्दायू जिले में दो सगी दलित बहनों को उसी गाँव के दुसरे जाति के लड़को द्वारा बलात्कार कर बेरहमी से हत्या कर लटका दिया गया | बना रहें बनारस साझा मंच की संयोजिका सुश्री. मुनिजा रफ़ीक खान जी ने कहा कि आज देश के विभिन्न राज्यों में राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, बंगाल, बिहार सहित उत्तर प्रदेश में महिलाओं और लडकियों के साथ लगातार बढ़ती बलात्कार की घटनाएँ, भ्रूण हत्या पितृसत्तात्मक फासीवादी ताकतों दवारा किया जाने वाला हिंसा का भयानक व विभस्त रूप है | यह न केवल पितृसत्ता और लैंगिक गैरबराबरी पर आधारित सोच को घटनाओं के रूप में सामने ला रहा है, बल्कि क़ानून व सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ी चुनौती दे रहा है, जो कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश व् समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा है | एक तरफ़ सांप्रदायिक एवं फ़ासीवादी ताकतें लोकतांत्रिक मूल्यों को तोड़ने का प्रयास कर रही है और उसके सामंती मानसिकता से ग्रस्त गुर्गे लगातार अपने चरम व घोर पितृसत्ता मूल्यों को अपने कुकृत्यों से पोषित कर रहे हैं | इस समय समाज के सभी लोगों को महिलाओं, बच्चों, अल्पसंख्यकों पर बढ़ते जातिगत, सांप्रदायिक हमले का खुल कर हर मोर्चे पर विरोध करना चाहिये और सरकार पर लगातार यह दबाव बनाया जाना बहुत जरूरी है कि वह इस प्रकार की घटनाओं को बहुत संवेदनशील ढ़ंग से संज्ञान में लेते हुए हल करना होगा|  







कैंडिल मार्च में साम्प्रदायिक ताकतें हो बरबाद, फासीवादी ताकतें हो बरबाद, कट्टरपंथी विचारधारा हो बरबाद, बलात्कार की संस्कृति हो बरबाद, जैसे नारे बुलन्द कर पुरजोर खिलाफत किया गया| मार्च में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों फारवर्ड ब्लाक, कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (मार्क्सवादी), कांग्रेस पार्टी, आम आदमी पार्टी, सहित कई जनसंगठन, प्रगतिशील लेखक संघ, विजन, मानवाधिकार जननिगरानी समिति, रंगमंच से जुड़े रंगकर्मी, रिहाई मंच, साहित्यकार, बुद्धिजीवी ,चिंतक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हुए | प्रमुख रूप से व्योमेश शुक्ला, संजय श्रीवास्तव, संजय भट्टाचार्य, अतीक अंसारी, कामरेड हीरालाल, डा0 लेनिन रघुवंशी, जहीर, हाजी इश्तियाक, मोहम्मद बिलाल, जाग्रति राही, रियाजुलहक, अब्दुल्ला खान, शिरिन शबाना खान, शिव प्रताप चौबे, इरशाद अहमद, छाया, अजय सिंह, अजित सिंह आदि सैकड़ों कार्यकर्त्ता शामिल हुए |


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Wednesday, 4 June 2014

विद्यालय विकास में विद्यालय प्रबन्धन समिति व अध्यापको की भूमिका [पराड़कर स्मृति भवन, वाराणसी] मई 24, 2014

“विद्यालय विकास में विद्यालय प्रबन्धन समिति व अध्यापको की भूमिका एवं जिम्मेदारी” विषय पर थियेटर के माध्यम से संवाद 
तीन लघु नाटको समस्या, संभावना और बदलाव का बच्चो द्वारा मंचन, “भूमिका एवं जिम्मेदारी” नामक पाकेट बुक का विमोचन एवं तीन विद्यालय प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को विशिष्ट योगदान के लिए जनमित्र सम्मान 


वाराणसी, 24 मई, 2014 पराड़कर स्मृति भवन, मैदागिन में विद्यालय विकास में विद्यालय प्रबन्ध समिति एवं अध्यापको की भूमिका विषय पर थियेटर के प्रभावशाली माध्यम से संवाद का आयोजन मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा किया गया | जिसमे वाराणसी के विभिन्न ग्रामीण विद्यालयों के 25 विद्यालय प्रबन्ध समिति एवं अध्यापक समूह से लगभग 100 लोगो की महत्वपूर्ण भागीदारी किया | इस संवाद कार्यक्रम में विद्यालय विकास में प्रबंधकीय गुणवत्ता सुधार में वाराणसी पिंडरा स्थित विद्यालय में अग्रणी भूमिका लेने हेतु प्राथमिक विद्यालय पिंडरा न0 2 की विद्यालय प्रबन्ध समिति की उपाध्यक्षा श्रीमती सुरसती देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहिरौली हरहुआ विद्यालय प्रबन्धन समिति की अध्यक्षा श्रीमती बिंदु देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरौना अराजीलाइन की अध्यक्षा श्रीमती उर्मिला देवी को जनमित्र सम्मान से सम्मानित किया गया | 


साथ ही विद्यालय प्रबन्ध समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारियां शीर्षक से पाकेट बुक का विमोचन किया गया | यह पाकेट बुक से विद्यालय प्रबन्धन समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारियों को बहुत ही सरल भाषा में समझा जा सकता है | 

इस संवाद कार्यक्रम में विद्यालय विकास में प्रबंधकीय गुणवत्ता सुधार में वाराणसी पिंडरा स्थित विद्यालय में अग्रणी भूमिका लेने हेतु प्राथमिक विद्यालय पिंडरा न0 2 की विद्यालय प्रबन्ध समिति की उपाध्यक्षा श्रीमती सुरसती देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहिरौली हरहुआ विद्यालय प्रबन्धन समिति की अध्यक्षा श्रीमती बिंदु देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरौना अराजीलाइन की अध्यक्षा श्रीमती उर्मिला देवी को जनमित्र सम्मान से सम्मानित किया गया | 




जन संवाद के सशक्त माध्यम थियेटर से तीन लघु नाटको समस्या, संभावना और बदलाव का मंचन बच्चो द्वारा कर यह सन्देश देने का प्रयास किया कि स्कूल में बच्चो की नजर में पठान पाठन के दौरान क्या समस्या आती है और कैसे उन समस्याओं को विद्यालय प्रबन्धन समिति की सहभागिता से दूर किया जा सकता है | 



कार्यक्रम में आये सभी विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्य, अध्यक्ष और अध्यापको का धन्यवाद करते हुए मंगला प्रसाद (बाल अधिकार कार्यकर्ता) ने कहा कि निश्चित रूप से आप सभी की उपस्थिति बच्चो, शिक्षा अधिकार पर कार्यरत प्रभावी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं, सन्दर्भ समूहों एवं व्यक्तियों को प्रोत्साहित और अधिकारों का समर्थन करेगी | कार्यक्रम का संचालन इरशाद अहमद और स्वागत अनूप श्रीवास्तव ने किया |

Photo by: Rohit Kumar as initiative of PVCHR: life and struggle of Neo Dalit Movement through camera of born Dalit against caste system
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