Thursday, 4 December 2014

अम्बेडकर जी के मूर्ति के पास “संविधान दिवस” मनाया गया





26 नवम्बर, वाराणसी में मानवाधिकार जननिगरानी समिति/जनमित्र न्यास द्वारा कचहरी स्थित अम्बेडकर मूर्ति के पास संविधान दिवस मनाया गया | जिसमे वाराणसी के विभिन्न संगठन शामिल हुए और अम्बेडकर जी के मूर्ति के पास मोमबत्ती जलाकर संविधान को जमीनी स्तर पर और मजबूती से लागू करवाने हेतु और संविधान निर्माताओ के सपनों को जमीनी स्तर पर पूरा करने और उनके सम्मान में चर्चा बैठक किया गया |

कार्यक्रम की शुरुआत में डा0 राजीव सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को की गई, जिसका गठन भारतीय नेताओं और ब्रिटिश कैबिनेट मिशन के बीच हुई बातचीत के परिणाम स्‍वरूप किया गया था। इस सभा का उद्देश्‍य भारत को एक संविधान प्रदान करना था जो दीर्घ अवधि प्रयोजन पूरे करेगा और इसलिए प्रस्‍तावित संविधान के विभिन्‍न पक्षों पर गहराई से अनुसंधान करने के लिए अनेक समितियों की नियुक्ति की गई। सिफारिशों पर चर्चा, वादविवाद किया गया और भारतीय संविधान पर अंतिम रूप देने से पहले कई बार संशोधित किया गया तथा 3 वर्ष बाद 26 नवंबर 1949 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया।

अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की तंत्र प्रणाली का आधार हमारा संविधान है | जिसके द्वारा भारत के नागरिक होने के नाते अधिकार और कर्तव्य का निर्धारण किया गया है | 26 नवम्बर, 1949 को संविधान सभा द्वारा सर्व सम्मत से संविधान को अंगीकृत किया गया था | यह भारतीयो के लिए एक गौरवशाली दिन रहा है | जिसे आज पूरे देश में संविधान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है |

चर्चा बैठक में श्रुति नागवंशी ने कहा कि भारतीय संविधान भारतीयों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है लेकिन जमीनी स्तर पर जो मानवाधिकार हनन की घटनाएं बढ़ती जा रही है खास कर बच्चो, महिलाओ व जातिगत आधार पर भेद-भाव की घटनाये दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जबकि संविधान बनाने वाले विद्वानों ने इस पर विशेष रूप से ध्यान देते हुए इसे रोकने हेतु कठोर क़ानून बनाने का काम किया है | परन्तु इसके बावजूद भी इस तरह की घटनाये रूक नहीं रही है | यह एक चिंता का विषय है और हम सभी भारतीयों को इसपर मिलजुल कर काम करने की जरूरत है|

चर्चा बैठक के बाद मोमबत्ती जलाकर अम्बेडकर मूर्ति की परिक्रमा की गयी और समापन किया गया| कार्यक्रम का संचालन इरशाद अहमद ने किया और धन्यवाद शिरीन शबाना खान ने दिया|

संविधान दिवस के इस अवसर पर जै कुमार मिश्रा, शिरीन शबाना खान, अजय सिंह, इरशाद अहमद, डा0 राजीव सिंह, अनूप श्रीवास्तव, आनंद प्रकाश, पिंटू गुप्ता, शिव प्रताप चौबे, छाया, फरहत, ओमकार, वंदना, मनोज सिंह, प्रभाकर, दिनेश, रोहित, विजय, अरविन्द, उमेश, अजीत, दिनेश, घनशयाम, दिलशाद, राजेन्द्र, बलिन्दर, राकेश, दीपक, अर्चना, स्वाती सहित अन्य लोग उपस्थित थे |

Musicians Against Torture




















वाराणसी, 28 नवम्बर 2014 को जगतगंज स्थित कामेश हट होटल में यश भारती सम्मान से सम्मानित सुप्रसिध सरोद वादक पण्डित विकास महाराज और उनके साथ पण्डित प्रभाष महाराज (तबला वादक) एवं पण्डित अभिषेक महाराज (सितार वादक) - महाराज ट्रायो ने अपने वाद्य यंत्रो को झंकृत करते हुए सुरों के माध्यम से यातना की खिलाफत करते हुए दुनिया में शान्ति, प्यार और विविघता की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की | इस कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना दिवंगत सितारा देवी को श्रधान्जली देकर किया गया |

यातना के खिलाफ संगीत संध्या का आयोजन मानवाधिकार जननिगरानी समिति, जनमित्र न्यास एवं डेनिश संस्था डेनिश इंस्टीट्यूट अगेंस्ट टार्चर (डिग्निटी) के द्वारा न्यायमूर्ति श्री. रंगनाथ मिश्रा (मुख्य न्यायाधीश भारत सरकार, पूर्व अध्यक्ष राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) एवं मानवाधिकार जननिगरानी समिति के सलाहकार समिति के सदस्य) की स्मृति में किया गया |

इस मौके पर यातना और लैंगिक हिंसा व भेदभाव की खिलाफत करते हुए अपनी शिक्षा को जारी रखते हुए लडकियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दो बालिकाओं यास्मिन, नन्दिनी और उनके माता पिता, श्रीमती शाहजंहा, श्री मुन्ना हाशमी एवं श्रीमती चनरावती, श्री रामकेवल को अपनी बेटियों के संघर्ष में हर सम्भव साथ देने के लिए जनमित्र सम्मान से सम्मानित किया गया |

म्यूजिशियन अगेंस्ट टार्चर अभियान की शुरुआत करते हुए पण्डित विकास महाराज जी ने कहा कि संगीत के प्रयोग से व्यक्ति तनाव मुक्त होता है और संगीत सामान्य जीवन जीने में सहायक होता है | काफी शोधो से यह सिद्ध हो चुका है कि संगीत के प्रयोग से व्यक्ति तनाव और अवसादमुक्त होता है | संगीत का प्रयोग मनोवैज्ञानिक चिकित्सा/थेरेपी के रूप में भी किया जाता है | संगीत में शांति और सुख देने का अद्भूत गुण है | संगीत पर ध्यान केंद्रित करके दुःख दर्द से व परेशानियों से मुक्त होता है । संगीत शारीरिक प्रतिक्रियाओं के परिवर्तन में सहयोगी है जो व्यक्ति के सामाजिक व मनोवैज्ञानिक विकास के लिए काफी सहायक है |

वर्तमान में जहाँ पूरा विश्व संगीत की महत्ता व उसकी उपयोगिता को समझकर उसे अपना रहा है | पंडित विकास महाराज ने कहा कि वे दुनिया भर के संगीतकारों से अपील करेंगे कि वे संगीत के द्वारा यातना मुक्त विश्व बनाने के लिए पहल करे और PVCHR द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान में शामिल हो |

यातना के खिलाफ “ Musicians Against Torture ” विषय पर अवधारणा रखते हुए डा . लेनिन रघुवंशी ने कहा कि मानवाधिकार जननिगरानी समिति (PVCHR) अपनी स्थापना के समय से यातना और संगठित हिंसा की खिलाफत करता है और उत्तर प्रदेश, झारखण्ड सहित अन्य राज्यों के 70 ग्रामों को यातना मुक्त आदर्श ग्राम बनाने का कार्य डेनमार्क की संस्था डेनिश अगेंस्ट टार्चर (डिग्निटी) के साथ मिलकर कर रहा है |

PVCHR के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे पंडित विकास महाराज इस यातना मुक्त संगीत अभियान के अंतर्राष्ट्रीय राजदूत और अत्याचार के खिलाफ संगीतकारों के संस्थापक सदस्य नामित हुए है । इस अभियान की सफलता के लिए उत्तर-प्रदेश के उच्च न्यायायलय के न्यायाधीश माननीय मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री.अमर शरण ने बधाई पत्र भेजा है और अपना सन्देश और शुभकामनाये दी है |

कार्यक्रम का संचालन श्री. अशोक आनन्द जी द्वारा किया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन PVCHR गवर्निंग बोर्ड की उपाध्यक्ष सुश्री बिंदु सिंह जी ने किया |

[i][i] http://www.scribd.com/doc/59035158/Justice-Shri-Rangnath-Mishra-meber-of-Advisory-Committe-PVCHR
[ii] http://en.wikipedia.org/wiki/Music_therapy

Peoples’ Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR), a program unit of Jan Mitra Nyas with support from Dignity: Danish Institute Against Torture launched an initiative “Musicians Against Torture” on 28th November, 2014 in a musical evening against torture in memory of Justice Shri Rangnath Mishra (former Chairperson of NHRC, Former Chief Justice of India and member of advisory committee at PVCHR)[i].
The famous Maharaj Trio Pandit Vikash Maharaj, Sarod Maestro and awarded with highest civilian award of Uttar Pradesh, his son Pandit Prabhash Maharaj, Tabla Player and Pandit Abhishek Maharaj sitar player performed in this historical evening.

The objectives behind initiative: Musicians against Torture:

1. Bringing Musician for creating Torture free world

2. Establishing the importance of Musical therapy as a part of trauma care.

3. Promoting culture of peace, love and diversity through music.

Music has many calming and soothing properties that can be used as a sedative in rehabilitation. For example, a patient with chronic pain may decrease the physiological result of stress, and draw attention away from the pain by focusing on music. Music has the ability to associate physiological changes in the body and elicit physiological responses.[ii]

Later after launching of the campaign Pandit Vikash Maharaj Ambassador of PVCHR and founder of Musicians Against Torture will appeal to the Musicians around the globe to join this campaign for creating torture free globe.
Since its inception PVCHR is voicing against the torture and organized violence and working to create 70 torture free model villages in Uttar Pradesh and Jharkhand state of India with the support from Dignity: Danish Institute Against Torture since 2010.

Wednesday, 19 November 2014

Saturday, 8 November 2014

14 Muslim minority girls awarded with scholarship with support of Sir Dorabji Tata Trust [PVCHR Ofiice] November 08, 2014














1. Ruma Firdous, 2. Shama Parveen, 3. Sana Gazal, 4. Zarfishan, 5. Irama Naj, 6. Murshida Khatoon, 7. Rokaiyaa Parveen, 8. Tabassum Noori, 9. Gulfisha Mehandi, 10. Ujma Siddika, 11. Rukhasar Bano, 12. Shabnam Bano, 13 Naushab Nasreen, 14. Samareen Fatma (all are from Bazardiha,Varanasi)

Thursday, 30 October 2014

बाल महोत्सव में बाल अभिव्यक्ति – “हिफ़ाजत मेरा हक़” [मूलगादी कबीरचौरा मठ, वाराणसी] अक्टूबर 18, 2014

बाल पंचायत के बच्चों ने लघु नाटकों द्वारा बाल हकों की पैरवी में बुलन्द की अपनी आवाज......

वाराणसी के मूलगादी कबीरचौरा मठ में विभिन्न बाल पंचायतों के प्रतिनिधि बच्चों ने बाल महोत्सव “हिफ़ाजत मेरा हक़” में लघु नाटकों के माध्यम से बाल श्रम, गुमशुदा बच्चों एवं बाल विवाह के मुद्दों पर अपनी प्रस्तुति देते हुए अपने बाल अधिकारों की पुरजोर पैरवी की | अपने नाटकों से जरिये इन बच्चों ने समाज को यह सोचने पर विवश किया कि बाल संरक्षण के कई कानूनों और विभिन्न सुरक्षा प्रणालियों के बाद आज भी बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा और विकास से दूर खुशहाल बचपन का सिर्फ सपना संजोये शोषण और यातना का शिकार हैं | जिसमें बच्चों के सुरक्षा और संरक्षण के मुद्दे पर सवाल खड़ा किया गया |

हिफाजत मेरा हक – बाल महोत्सव का आयोजन मानवाधिकार जननिगरानी समिति (PVCHR) जनमित्र न्यास (JMN) द्वारा ग्लोबल फण्ड फॉर चिल्ड्रेन (GFC) एवं सर दोराब जी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के सहयोग से किया गया | जिसमें वाराणसी जिले के विभिन्न ब्लाकों से वंचित व अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के कुल 38 बच्चों द्वारा तीन लघु नाटकों में गुमशुदा बच्चों के मुद्दे पर “खो गये हैं हम” बालश्रम के मुद्दे पर “मेरा भी है बचपन” बालविवाह के मुद्दे पर “करनी थी पढाई हो गयी विदाई” के माध्यम से अधिकारों की पुरजोर पैरवी और अपने विचारों की अभिव्यक्ति की गयी | इन नाटकों में बच्चो ने उन समस्याओं और चुनौतियों को सामने उकेरने का प्रयास किया जिन वे और उनके जैसे दूसरे लाखों बच्चे रोजमर्रा की जिन्दगी में सामना करते हैं | 

इन लघु नाटकों की रचना बच्चों ने पिछले तीन दिन के थियेटर कार्यशाला में श्री वाल्टर पीटर (पूर्व सदस्य, TIE, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) के निर्देशन में किया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यशभारती सम्मान से सम्मानित सुप्रसिद्ध सरोद वादक पण्डित विकास महाराज जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि आचार्य संत विवेकदास जी एवं सुश्री तीस्ता सीतलवाड़ रहीं | इस मौके पर बच्चों ने प्रतीकात्मक रूप पटाखों को पानी में डालकर दीपावली पर पटाखा नही जलाने का संकल्प लिया और सभी से यह अपील किया कि वे भी दीपावली पर दीप जलाकर दीवाली मनाएं पटखा जलाकर नही | महोत्सव में कुल उन्नीस (19) बाल पंचायतों से सैकड़ो बच्चे और उनके माता पिता सहित शहर के प्रबुध्दजनो ने बड़े उत्साह से भाग लिया और बाल सुरक्षा की पैरवी की |

कार्यक्रम के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए श्रुति नागवंशी मैनेजिंग ट्रस्टी, ने कहा “बाल सुरक्षा की स्थिति उत्तर प्रदेश की भयावह स्थिति सामने लाता है | प्रदेश में गुमशुदा बच्चों, लिंग अनुपात, बाल श्रम, बाल विवाह, बाल यौन हिंसा की घटनाओ में दुसरे प्रदेशों से कंही अधिक है | हमें बाल संरक्षण के काम में लगे ढाचों व् व्यवस्थायों को मजबूत करते हुए , सभी हितधारकों के समन्वय और जवाबदेही को बढ़ावा देकर राज्य, जिला और समुदाय स्तर पर एक मजबूत निवारक और जवाबदेह बाल संरक्षण प्रणाली को बनाने, स्थापित करने मजबूत करने की जरूरत है |"
मुख्य अतिथि पण्डित विकास महाराज जी ने कहाकि बच्चे ही देश का भविष्य हैं किन्तु वे जिन अमानवीय परिस्थितियों में जीने को बाध्य हैं इससे न केवल उन बच्चों का बचपन प्रभावित होता है बल्कि देश का भविष्य और विकास भी प्रभावित हो रहा है | 

विशिष्ट अतिथि सुश्री तीस्ता सीतलवाड़ ने कहाकि बाल अधिकारों के संरक्षण और सम्वर्धन के लिए सरकार के साथ ही समाज को बहुत समवेदनशीलता जबाबदारी के साथ काम करने की बेहद जरूरत है | इस अवसर पर मानवाधिकार जननिगरानी समिति के निदेशक डा. लेनिन रघुवंशी, इदरीश अंसारी सहित काशी विद्यापीठ समाजकार्य विभाग सुश्री भावना वर्मा, मुनिजा खान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुश्री. निरुपमा सिंह, जिला प्रोवेशन अधिकारी श्री प्रभात रंजन जी उपस्थित रहे |

• उत्तर प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति
• 2012 में दर्ज राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो (SCRB) के अनुसार कुल लापता 3879 बच्चों में केवल 2310 बच्चे ही घर वापस आ पाये शेष 1569 बच्चे अभी भी लापता हैं | 
• 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य के कई जिलों में बच्चों का लिंग अनुपातबहुत कम रिकार्ड किया गया है 
• एनएसएसओ 2009-10 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 1775333 बाल श्रमिक है जो कि देश में सबसे अधिक संख्या है |
• नेशनल अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के 2011 के डेटा से पता चलता है कि बच्चों के प्रति अपराधों में 24% की वृद्धि हुई है |
• शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जीवित जन्म में 70 मौते होती है जो रास्ट्रीय औसत 1000 जीवित में 52 मौतों की तुलना अधिक है |
• 50% लडकियों का विवाह 18 साल से कम उम्र में ही हो जाता है |
• केवल उत्तर प्रदेश में लगभग 9 लाख बच्चे बालश्रम में लगे हैं |

कुछ विशेष और आवश्यक प्रयास जो सुरक्षा के लिए किये जाने चाहिए :

बच्चो को उत्पीड़न, हिंसा और शोषण से बचाने के लिए बच्चों के लिए एक सुरक्षात्मक वातावरण बनाया जाय |
सभी स्तरों पर बाल संरक्षण संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न स्तरों आईसीपीएस के तहतगांव, ब्लॉक एवं जिला बाल संरक्षण इकाइयों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम बनाए जाय और पदाधिकारियों के लिए अलग|
राज्य में लापता बच्चों के लिए संचालन प्रक्रिया के निर्माण का मानक सुनिश्चित किया जाय |
राज्य के सभी जिलों में एंटी मानव तस्करी सेल को सक्रिय किया जाय | 

पूरे राज्य में पुलिस स्टेशन के लिए यह अनिवार्य किया जाय कि माननीय उच्च न्यायालय के दिशानिर्देश के अनुसार किसी भी बच्चे के लापता होने का अनिवार्य रजिस्टर बनाया जाय और और किशोरों की शिकायत को देखने के लिए एक विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की जाय,प्रत्येक लापता बच्चे की रिपोर्ट को प्राथमिकी (FIR) में परिवर्तित किया जाना चाहिए |
ICPS के मूल्यांकन पर जिला स्तर पर कमजोर परिवारों की पहचान की जाय और गैर संस्थागत देखभाल और पालक-देखभाल को प्रायोजित किया जाय |

उत्पीड़न, हिंसा और शोषण से बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी कानूनो का क्रियान्वयन हो; उदाहरण के लिए, बाल विवाह निषेश अधिनियम, 2006 का प्रभावी कार्यान्वयन; बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम, 1986; POCSO अधिनियम, 2012 आदि |