Wednesday, 9 April 2014

बुनकर सम्मलेन [पराडकर स्मृति भवन, वाराणसी] अक्टूबर 31, 2013

बुनकर दस्तकार अधिकार मंच एवं मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा “पराडकर स्मृति भवन” मैदागिन में आज बुनकरों की आम समस्याओं व उनके निराकरण हेतु “बुनकर सम्मलेन” का आयोजन किया | इस सम्मलेन में वाराणसी के सभी क्षेत्रो से सैकड़ो बुनकर एकत्रित हुए साथ ही बुनकर विभाग के पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए| इस सम्मलेन का मुख्य उद्देश्य बुनकरों की समस्याओं के क्या निराकरण है इस पर चर्चा की गयी| जिसमे बुनकर विभाग, बुनकरों के स्थानीय नेता और आम बुनकरों ने मिलकर अपनी समस्याओं और उनको कैसे दूर किया जा सकता है इसपर ज्ञापन तैयार कर सभी के सहमति से उसे राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा | 









सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए नुरुल हक़ ने कहा कि पिछले वर्ष बुनकर मजदूरों के लिए 50% मजदूरी बढाने के लिए जो आन्दोलन किया गया था। उससे गृहस्था को मजदूरी बढाने में क्या परेशानी है जब-जब मैटेरियल का दाम बढ़ा और गृहस्था ने कारोबार बन्द किया तब हम मजदूर बुनकरों ने उनका खुल कर साथ दिया आज जब गृहस्था मजदूरी बढ़ाने का काम करते है तो बुनकर संगठन के लोग उनका भी माल का रेट बढ़ाने में उनका खुल कर साथ देंगे। 

यासिन मोकादम ने कहा कि केन्द्र व प्रदेश की सरकार की गलत निति की वजह से आज बुनकारों के हालात खराब हुए है। सरकार ने हमेशा उन्ही लोगों का साथ दिया जो सोसाइती व सहकारी समिति के नाम पर लूटने का काम करते है। 


अब्दुल वहीद अंसारी ने कहा है कि जो कर्मचारी यहाँ आया व यही का होकर रह गया चाहे लाइन मैन हो या जे0ई0 या फिर उच्च अधिकारी सबने अपना-अपना काम करने के लिए अपने लोगों की टीम बना रखी है। 


अब्दुल कयूम ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि वाराणसी में पहली वार काफी तादाद में बुनकर भाईयों ने विभिन्न बैंको से लोन लिया कुछ बुनकरों ने तो लोन का पैसा जमा किया कुछ ने थोडा बहुत जमा किया तो कुछ बुनकरों की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से अपना पैसा नही जमा कर पाए। इसी बीच भारत की सरकार ने पचास हजार तक का लोन बुनकरों का मांग करने का एलान कर दिया इसी वजह से अधिकार बुनकरों ने यह समझा की अब हम बुनकर लोन से आजाद हो गए लेकिन ऐसा नही हुआ। 


अब्दुल कादिर ने कहा की सरकार कि ओर से जो भी स्कीम बुनकर के लिए लागू किया गया वह पूरी तौर पर आम बुनकर तक नही पहुँची है। इसके लिए सीधे-सीधे ADI व बुनकर सेवा केन्द्र जिम्मेदार है। 


आफताब अहमद ने कहा कि जब से सरकार ने U.P. हैण्डलूम को बन्द कर दिया है। तबसे चन्द पुजी पतियों ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। इस वजह से भी बुनकर बरवाद हुआ है।


सिद्दीक हसन ने कहा कि आम बुनकर लगातार उपेक्षा का शिकार होता रहा है लेकिन हमेशा एकजुट होकर स्थानीय स्तर से लेकर राज्य व केंद्र सरकारों तक अपनी बात कही परन्तु कोइ भी बुनकरों की समस्याओं के निराकरण हेतु किसी प्रकार का कोइ भी ठोस कदम नहीं उठा रहा है | 


इस कार्यकम में वाराणसी के कई क्षेत्रो से बुनकर उपस्थित हुए जैसे लल्लापुरा, लोहता, बजरडीहा, कज्जाकपूरा, मदनपुरा, धन्नीपुर, सरैया, नक्खीघाट, सारायमोहाना, बघवानाला आदि | इस कार्यक्रम का संचालन इदरीश अंशारी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन शिरिन शबाना खान ने दिया |

Photo by: Rohit Kumar as initiative of PVCHR: life and struggle of Neo Dalit Movement through camera of born Dalit against caste system
http://www.bistandsaktuelt.no/nyheter-og-reportasjer/arkiv-nyheter-og-reportasjer/it-opptur-for-indias-kastel%C3%B8se