Tuesday, 19 May 2015

वाराणसी, पिण्डरा ब्लाक, सराय मुसहर बस्ती - यातना मुक्त मॉडल गांव

एक समय ऐसा था कि न पेट भरने के लिये भोजन नही प्यास बुझाने के लिये पानी, न तो रहने के लिये छत और नही शरीर ढकने के लिये कपड़ा। उस समय ऐसा लग रहा था कि मुसहर जाति में पैदा होना एक अभिशाप है।

सराय मुसहर बस्ती मानवाधिकार जननिगरानी समिति के सहयोग एवं जागरूकता से वर्तमान में प्रगतिशील गांव की श्रेणी में शामिल हो गया है।

सराय मुसहर अर्थिक, सामाजिक रूप से वंचित समुदाय था। विगत 5 वर्षो मे पी0वी0सी0एच0आर0 के पहल पर दस गांव के लोगों में अपनी सामाजिक स्थिति तथा रहन सहन को लेकर एक व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। पी0वी0सी0एच0आर0 के लगातार जागरूकता अभियान, शिक्षा, स्वास्थ तथा अर्थिक स्त्रोतो पर कार्य करने के पश्चात जहां लोगो का जीवन किसी तरह अंधेरे में गुजर रहा था। अब सराय मुसहर बस्ती में लोगों द्वारा प्रकाश के लिए सौर उर्जा संचालित प्रकाश यंत्रों का प्रयोग रात में किया जाने लगा है। आधुनिक संचार साधनों DTH Television  का प्रयोग कर रहे है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबुत करने के लिये गाय, भैंस, बकरी तथा मुर्गी पालन कर रहे है। इस मुनाफे का प्रयोग भविष्य को सुरक्षित रखने तथा बच्चों की शिक्षा और अपनी खुशियों के लिये कर रहे है। गांव के सामुदायिक प्रशासन और पी0वी0सी0एच0आर0 के पहल से पक्की सड़क, मकान जलकूप का भी प्रयोग कर रहे है।